रेल मंत्री ने स्वदेशी फुल स्पैन लॉन्चिंग मशीन को दिखाई हरी झंडी
Full Span Launching Equipment to expedite construction
इस मौके पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन के तहत सरकार भारतीय रेलवे को देश के समावेशी विकास का इंजन बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय रेलवे एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसमें आम जन की भावना समाहित हैं। आज 21वीं सदी में भविष्य को दृष्टि में रखकर योजनाएं बनाने और उन्हें धरातल पर कार्यान्वित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज का समारोह उसी नए भारत की तरफ कदम बढ़ाने का एक उदाहरण है।
मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना (एमएएचएसआर) के 508 किलोमीटर लंबे मेहराबदार निर्माण के लिये उत्कृष्ट प्रणाली इस्तेमाल की जा रही है। इस निर्माण में फुल-स्पैन लॉन्चिंग प्रणाली (एफएसएलएम) का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रौद्योगिकी के जरिये पहले से तैयार पूरी लंबाई वाले गर्डरों को खड़ा किया जाता है, जो बिना जोड़ के पूरे आकार में बने होते हैं। इन्हें दोहरे मेहराबदार ट्रैक के लिये इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मदद से निर्माण कार्य में तेजी आती है। एफएसएलएम को दुनिया भर में इस्तेमाल करते हैं, जहां मेट्रो प्रणाली के लिये मेहराबदार निर्माण में इससे मदद मिलती है। ऐसी मशीनों के डिजाइन बनाने और उनका निर्माण करने में अब भारत भी इटली, नार्वे, कोरिया और चीन जैसे देशों के समूह में शामिल हो गया है।
कंक्रीट के उपयोग से पहले से तैयार चौकोर गर्डर (प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट-पीएससी) को भी लॉन्च किया जाएगा। इन गर्डरों का भार 700 से 975 मीट्रिक टन है और इनकी चौड़ाई 30, 35 तथा 45 मीटर की है। इन्हें भी एफएसएलएम प्रणाली के जरिये हाई-स्पीड गलियारे के लिये लॉन्च किया जाएगा। सबसे भारी-भरकम पीएससी चौकोर गर्डर का भार 975 मीट्रिक टन है और उसकी लंबाई 40 मीटर है। भारत में एमएएचएसआर परियोजना के लिये पहली बार इसका उपयोग किया जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने के लिये 1100 मीट्रिक टन क्षमता वाले एफएसएलएम उपकरण को स्वदेशी स्तर पर बनाया गया है। इसका डिजाइन भी यहीं तैयार किया गया है। मेसर्स लार्सन एंड टुब्रो की चेन्नई स्थित कांचीपुरम की निर्माण इकाई में इसे बनाया गया है। इसके लिये मेसर्स एल-एंड-टी ने 55 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के साथ साझेदारी की थी।


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